
एक आवाज काफी है , धड़कने रुकने के लिए
उसकी आहट काफी है , मूड बदलने के लिए
उसकी आहट काफी है , मूड बदलने के लिए
---- painting by Raja Ravi verma
लबो पे जिसके कभी बद्दुआ नहीं होती
वो माँ है जो कभी खफा नहीं होती
जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है
माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है
