शनिवार, 14 जुलाई 2012

sawan

रिमझिम मौसम  की ,  सावनी  फुहारें 
माटी  से , सोंधी  खुशबू  लाये 
बरखा  की बूंदे  , तन को भिगोये 
शबनमी  यादे ,  मन  महकाएँ  

सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

फागुन

फागुनी हवा है वोह ,
मुट्ठी में बांधना है .......
खुशबु है , बसंती झोंको की
सजा हो पलकों पर ख्वाब कोई ....
रहता है सांसों में धड़कन बनकर
उड़ जाता है ,नींदों से , सपना बनकर .....

रविवार, 23 अक्टूबर 2011

लगे   रोशनी  की झड़ी झूम ऐसी
निशा की गली में तिमिर राह भूले ....

गुरुवार, 1 सितंबर 2011

31 Aug- Chand Id ka

आज मिल गया चाँद ईद का ,
खिड़की से चला आया हाथों   में मेरे -
मुस्करा कर लगा पूछने केफियत बीते दिनों की ...

बुधवार, 3 अगस्त 2011

3 Aug. 2011 -- teej.....

खुली आँखों के ख्वाब ...
हिना की खुशबू में महके  हुए
सांसों  में महकती है सावन की सोंधी  खुशबू ...
बुँदे     बारिश की ...मन  को छूती  हुई......
क्या यही सच है या उनीदा सा  khwab ......

बुधवार, 13 जुलाई 2011

13 july -- dastak

ना कोई आहट है ,ना कोई दस्तक
सब तरफ एक  तन्हाई  फ़ैली  है ,
चाँद भी  कुछ  बोलता  नहीं है आज ,
मुहं  छुपा रहा  है ,  बादलों  के  पीछे ........


     

गुरुवार, 23 जून 2011

सावन

रुकी रुकी सी बारिशों के बोझ से दबी दबी

झुके झुके से बादलों से -
धरती की प्यास बुझी
घटाओं ने झूमकर  
 मुझसे कुछ कहा तो है
बूंदे मुझे छू गई -
तेरा ख्याल आ गया


सोंधी खुशबू वाला पानी -
 तुझसे भी कुछ कहता होगा
बादल ने बारिश के हाथों
तुझको भी कुछ भेजा होगा


मेघों ने बरसकर ,
तुझसे कुछ कहा है क्या -
सावन की रिमझिम में
तेरा ख्याल आ गया          

A painting ( The starry night ) by Vincent van Gogh.....