गुरुवार, 23 अप्रैल 2015

Fija....


ताजा  हवा  का झोंका है या ,
   वादियों  की      फिजा ,
रँगत  है     साँझ      की  या
   बहारों   की   इल्तिजा ..........
 

1 टिप्पणी:

  1. नीलिमा जी आपकी यह रचना ताज़ा हवा के झोकों की तरह मन को छू जाने वाली रचना है.......ऐसी रचनाओं को आप शब्दनगरी में भी प्रकाशित कर सकतीं हैं, जो कि एक हिंदी कि ब्लॉगिंग व सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट है.........

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